झारखंड की राजनीति में एक बार फिर कुर्मी समाज और अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल किए जाने का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है।
डुमरी विधायक और युवा नेता जय राम महतो ने एक सार्वजनिक संवाद कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि कुर्मी समाज को लेकर उठ रही मांग कोई व्यक्तिगत एजेंडा नहीं, बल्कि दशकों पुराना सामाजिक आंदोलन है।
“कुर्मी समाज की बात करने पर बम क्यों फूट जाता है?” – जय राम महतो
जय राम महतो ने कहा कि जब कोई विधायक अपने समाज के विकास से जुड़ी मांग उठाता है, तो उसे नकारात्मक रूप से क्यों देखा जाता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब तेली समाज की आर्थिक उन्नति के लिए तेलीघानी बोर्ड या कुम्हार समाज के लिए माटी कला बोर्ड की मांग उठती है, तो उसका समर्थन होता है। लेकिन जब वे स्वयं कुर्मी समाज की बात करते हैं, तो राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध शुरू हो जाता है।
“जब कोई तेली समाज की बेटी अपने समाज की बात करती है, तो कोई विरोध नहीं होता।
लेकिन जब मैं कुर्मी समाज का बेटा होकर अपने समाज की बात करता हूं, तो इस राज्य में बम फूट जाता है।” – जय राम महतो
ST सूची में शामिल करने की मांग दशकों पुरानी
जय राम महतो ने साफ शब्दों में कहा कि कुर्मी समाज को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने की मांग उनके जन्म से भी कई दशक पहले से चल रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 1950 में बिना किसी स्पष्ट अधिसूचना के कुर्मियों को ST सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि 1931 के दस्तावेजों में उनकी स्थिति स्पष्ट थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कुर्मी कभी ST नहीं थे, तो फिर कई प्रतिष्ठित इतिहासकारों, समाज सुधारकों और पद्मश्री सम्मानित व्यक्तित्वों के दावे झूठे कैसे हो सकते हैं।
“यह फैसला संविधान और संसद को करना है”
जय राम महतो ने कहा कि किसी समाज की मांग को गलत ठहराना उचित नहीं है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को अधिकार देता है, और किसी भी वर्ग की मांग पर अंतिम निर्णय संविधान और संसद को लेना चाहिए।
“मांग करना अपराध नहीं है। समाधान निकालना सरकार और संसद का काम है।”
वैकल्पिक व्यवस्था पर भी दिया सुझाव
चुनावी घोषणापत्र को लेकर उठे सवालों पर जय राम महतो ने स्पष्ट किया कि समय की कमी के कारण कई बातों को विस्तार से नहीं लिखा जा सका।
उन्होंने कहा कि यदि ST सूची में सीधे शामिल करना संभव न हो, तो संविधान के दायरे में रहते हुए एक नया वैकल्पिक कॉलम या श्रेणी बनाई जा सकती है, जैसा कि OBC में अलग-अलग उपवर्ग राज्यों में बनाए गए हैं।
उनका सुझाव था कि:
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पहले से मौजूद कमजोर जनजातियों को अलग संरक्षण मिले
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नए शामिल होने वाले समुदायों के लिए अलग विकास और सुरक्षा ढांचा बने
चुनाव, जनसमर्थन और नई राजनीति
जय राम महतो ने अपने राजनीतिक सफर पर बात करते हुए कहा कि वे किसी राजनीतिक विरासत से नहीं आए हैं।
कम संसाधनों के बावजूद उन्होंने कम उम्र में राजनीति में अपनी पहचान बनाई और झारखंड की राजनीति में नई पीढ़ी की आवाज बनकर उभरे।
उन्होंने कहा कि:
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डुमरी विधानसभा में सीमित अंतर से जीत
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कम समय और सीमित संसाधनों के बावजूद मजबूत जनसमर्थन
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30 साल से कम उम्र में 7% वोट शेयर – यह अपने आप में ऐतिहासिक है
“मेरे बाद भी मेरा समाज रहेगा”
जय राम महतो ने स्पष्ट किया कि वे खुद को समाज से ऊपर नहीं मानते।
“मेरे होने से पहले भी मेरा समाज था, और मेरे बाद भी रहेगा।
यह लड़ाई किसी व्यक्ति की नहीं, पूरे समाज के सम्मान और अधिकार की है।”
निष्कर्ष
कुर्मी समाज और ST सूची को लेकर जय राम महतो का बयान झारखंड की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।
उन्होंने साफ कर दिया है कि यह मुद्दा न तो चुनावी स्टंट है और न ही व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, बल्कि एक लंबा सामाजिक संघर्ष है, जिसका समाधान संवैधानिक दायरे में होना चाहिए।